
1 जिस शहंशाह शाहजहां ने बेगम मुमताज की याद में ताज को बनवाया, उसी शहंशाह के मकबरे में उनकी ही कब्रों को सही रख-रखाव का इंतजार है। केवल ताज की चमक ही नहीं पीली पड़ रही है बल्कि भूमिगत कब्रें और कब्र वाला कमरा भी काला पड़ रहा है। शहंशाह के उर्स के दौरान जब शाहजहां और मुमताज की कब्रों वाले भूमिगत कमरे को तीन दिनों के लिए खोला गया तो यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।
2 बेहतरीन इनले वर्क वाली शाहजहां और मुमताज की भूमिगत कब्रों के साल भर बंद रहने से नमी का असर मार्बल पर पड़ रहा है। इससे दीवारों पर गुस्ल के बाद तीन दिनों तक पानी बहता दिखा। कब्रों के कमरे में संगमरमर की दीवारें काली और कब्रें भी खराब हो रही हैं। मुख्य गुंबद के नीचे 24 सीढ़ियां उतरने पर कब्रों के कमरे में चंद पल गुजारना भी मुश्किल है।
3 एएसआई ने मार्बल की सीढ़ियों पर लकड़ी के कवर लगा दिए, जिससे उनकी सफाई-धुलाई भी बंद हो गई है। अब इसके संरक्षण की दरकार है। एएसआई के पूर्व निदेशकों का मानना है कि वेंटिलेशन न होने और पूरे साल बंद रहने से ऐसा असर पड़ा है।
4 1864 में नार्थ वेस्टर्न प्रोविंस के इंस्पेक्टर जनरल हास्पीटल्स डा. मुरे ने यह रिपोर्ट दी कि 1857-58 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम केदौरान मुख्य गुंबद के अष्टकोणीय चैंबर की अंदरूनी दीवारों, जालियों और मुख्य कब्रों के इनले वर्क को जो नुकसान पहुंचा, उसका संरक्षण कराया जा चुका है। इसके बाद 1899-1900 में शहंशाह शाहजहां की कब्र के ऊपरी हिस्से में हुए बेहतरीन इनले वर्क को बदला गया।
5 1978 में कब्रों के उत्तर पश्चिमी दीवार पर पानी से खराब हुए संगमरमर को निकाल कर नए टुकड़े लगाए गए। 1986 में मुख्य गुंबद के शीशमहल में खराब हुए लाइम प्लास्टर, संगमरमर, अरबी में लिखे गए ब्लैक स्टोन वाले मार्बल पैनल और पीले-काले मार्बल के बार्डर को भी नए सिरे से लगाया गया।
6 टूरिज्म गिल्ड के सचिव राजीव सक्सेना के मुताबिक ताज में असली कब्रों के संरक्षण की जरूरत है। इसे खोला जाए, भले ही ज्यादा टिकट लगाकर कुछ ही पर्यटकों को आकर्षण के तौर पर दिखाया जाए। इससे हमेशा बंद रहने वाली भूमिगत कब्रें खुलेंगी और उनका रखरखाव भी हो सकेगा।
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